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हिन्दी साहित्य के सागर में से गागर भरते हुए पहली बार ऐसी कहानियाँ एक जिल्द में संकलित हैं जिनके शीर्षक में आया गिनती का अंक न केवल उत्सुकता जगाता है बल्कि हिन्दी कहानी की व्यापकता और गहराई से भी पाठकों को जोड़ता है। प्रेमचन्द, फणीश्वरनाथ 'रेणु', हरिशंकर परसाई, रवीन्द्र कालिया से लेकर स्वयंप्रकाश और असग़र वजाहत-सभी दिग्गज कहानीकारों की कहानियाँ इसमें सम्मिलित हैं। इन कहानियों की एक और विशेषता यह भी है कि इनमें कहानी विधा के सभी रस मिलते हैं। प्रेम, करुणा, रहस्य, रोमांच, हास्य, व्यंग्य और जीवन के उतार-चढ़ाव के चित्र इन कहानीकारों की कलम से निकलकर यादगार बन जाते हैं।
हिन्दी कहानी पर शोध कर चुके दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज के प्राध्यापक डॉ पल्लव इस अनूठी पुस्तक के संपादक हैं। इस पुस्तक में गिनती कहानियों की है, कहानियों के मार्फ़त है।
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